कानून की कहानी
कानून की कहानी
सुहानी की शादी रवि से हुई थी, दोनों ने पसंद से शादी की थी तो खुश भी बहुत थे दोनों पर धीरे धीरे सुहानी रवि पर उसके माँ पापा से अलग रहने का दबाव बनाने लगी। काफी बोलने के बाद भी रवि जब नहीं माना तो सुहानी धमकी देने पर उतर आई कि वापस अपने घर चली जाएगी पर फिर भी रवि अपने माँ पापा को छोड़ने तैयार नहीं हुआ।
सुहानी को समझ आ गया की ऐसे रवि मानेगा नहीं ना ही उसे जायदाद मे ही कुछ जल्दी मिल पाएगा। कुछ दिन घर मे शांति रही सुहानी ने किसी को कुछ नहीं कहा और लड़ाई भी बंद कर दी । पहले तो किसी को कुछ समझ नहीं आया सबको लगा सुहानी बदल गई है लेकिन असली बात तब पता चली जब रवि के घर पर पुलिस आई और
उसे और उसके पूरे परिवार को पुलिस स्टेशन लेकर आ गई । जब रवि ने पूछा तो उसके पैरो तले जमीन खसक गई । सुहानी ने उसके और उसके परिवार के खिलाफ दहेज और मार पीट की FIR दर्ज कारवाई थी और दहेज प्रथा के मामलो मे वैसे भी न किसी सबूत की जरूरत होती है न वारंट की ।
2 दिन तक सभी jail मे बंद रहे । उसके बाद सुहानी से बात करने पर उसने कहा वो case तभी वापस लेगी जब उसे property का काफी सारा हिस्सा बेचकर वो पैसा मिलेगा ।
रवि के पास कोई और रास्ता नहीं था उसने सारी property बेचकर सुहानी को पैसे दिये और तब सुहानी ने case वापस लिया ।
अब सभी वापस घर तो आ गए,, सुहानी को लगा उसने पूरी जंग जीत ली उसको नहीं पता था कि अपनी दोस्त के झूठे case वाले idea को अपनाने के बाद क्या खोया था उसने ।
अब वो अपने ससुराल मे तो थी पर एक अंजान इंसान की तरह उसके लिये किसी के मन मे कोई emotion नहीं बचे थे और रवि तो वैसे भी बहुत परेशान था, बदनामी की वजह से उसकी नौकरी चली गई थी, वो और उसकी family पूरे शहर मे बदनाम हो चुके थे ।
सुहानी कुछ दिन बाद वापस अपने घर चली गई ।
रवि मे सब कुछ ठीक करने की काफी कोशिश की पर नहीं कर सका आखिर एक दिन उसने अपने आप को मार लिया और उसके माँ पापा बेसहारा हो गए ।
ये कहानी कोई मन से बनाई हुई नहीं है ये सच्चाई है हमारे women safety के बने laws की, कही कही situations थोड़ी अलग हो सकती है ।
ये सही है कि काफी सारे मामले सही होते है लेकिन काफी झूठे भी होते है ।
Women safety के लिए बने laws औरतों को इंसाफ दिलाने के लिए बनाए गए थे लेकिन अब ये कई औरतों के लिए बदला लेने या अपने काम निकलवाने का जरिया बन चुके है कारण साफ है की इन कानूनों मे ये माना ही नहीं गया है की आदमी पर भी मार पीट हो सकती है उसे भी मानसिक या शारीरिक तौर पर परेशान किया जा सकता है ।
आपको नहीं लगता की इन एक तरफा कानूनों के कारण कई ऐसी महिलाए जो सच मे victim है उन्हे इंसाफ नहीं मिलता और कई ऐसे males है जो बेगुनाह होते हुए भी इन एक तरफा कानूनों की बली चढ जाते है ।
क्या अब इन कानूनों मे बदलाव नहीं होने चाहिए?
इस मुद्दे को आप और अच्छे से समझना चाहते है तो इस लिंक पर क्लिक करके ये विडियो देख सकते है
https://youtu.be/sWuvqkCko1g?si=duQZY7p5ATD3wZVT
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