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धर्मं

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  Me -तुमने उस लड़के को रखा नहीं जॉब पर?  तुम बोल रहे थे ना   कि  जरूरत है तुम्हें ?  Human Brain -हाँ जरूरत तो अभी भी है पर,  Me -पर क्या ?  Human Brain -तुम धर्मं देखकर तो लाते उसे ।  Me -मतलब? तुम्हें तो लकड़ा चाहिए था ना काम के लिए? काम आता था उसको तो भेज दिया तुम्हारे पास ।  Human Brain - तो धर्मं तो देखते उसका।  Me -तुम्हें उससे काम करवाना है या उसके धर्मं से? लकड़ा ईमानदार है, शरीफ है, समझदार भी है इससे ज्यादा क्या चाहिए तुम्हें ?   Human Brain -नहीं! ऐसे लोग बहुत खराब होते है, किसी के भी नहीं होते।  Me -धर्मं का सही अर्थ क्या होता है ?  धर्मं की परिभाषा क्या होती है?  धर्म की अवधारणा ?  धर्म किसने बनाया ?  धर्म का अर्थ?  इसमे से एक सवाल का सही जवाब दो  पहले, बाद मे बात करेंगे कि कौनसे धर्म के लोग कैसे होते है  Human Brain -मुझे ये सब नहीं पता, जो मुझे बताया है  मै  तो वही करूंगा ।   Me -आप 8 भाई बहन हो ना ?  Human Brain - हाँ क्यो ?  Me - आपके पापा के 8 बच्चे ह...

लड़कियों की जॉब

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  लड़कियों की जॉब  Me -लड़कियों के लिए सबसे अच्छा जॉब कौन सा होता है ?  और   12 वी के बाद लड़कियों के लिए कौन सी सरकारी नौकरी है?  Human brain -लड़कियो को काम करने की क्या जरूरत है ?  Me -क्यो?  Human brain -वो तो शादी करके चली जाएंगी उनका पति करेगा सब ,पति की कमाई से सब हो जाएगा उ न का  । Me -तो मतलब लड़कियो को पैरो पर खड़े होने की कोई जरूरत नहीं है ?  Human brain -शौक हो तो कर सकती है पर जरूरत तो नहीं है कोई ।     Me -तो तुम अपने लिए जॉब करने वाली बीवी क्यो ढूंढ रहे हो ?  Human brain -महंगाई का जमाना है अगर पति और पत्नी दोनों कमाने वाले हो तो घर अच्छे से चलेगा ना ।   Me -और तुम्हारी बीवी के माँ –पापा भी तुम्हारी सोच के निकले कि लड़कियों को जॉब करने कि कोई जरूरत नहीं   है,  फिर क्या करोगे?  Human brain -मै सब बात करके रखूँगा पहले ही।  Me -और तुम्हारी बेटी होगी तो उसकी जॉब ?  Human brain -वो क्यो करेगी जॉब? उसका पति करेगा सब  । Me -अजीब दोगलापन है तुम्हारा ! अपने लिए अलग नियम और...

Equality

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  Equality Human brain -  मुझे Equality चाहिए ।   Me –                  मिल जाएगी, कोशिश कर तो रहे सब मिलकर ।  Human brain-   मिल कहाँ रही पूरी तरह से ।                                                            बस मे महिला सीट पर आदमी बैठ जाते है,                               स्पेशल कम्यूनिटी के लिए जो सुविधाये दे रखी है                               उसे  बाकी कम्यूनिटी वाले ले लेते है,                               जहा महिलाओ के लिए सुविधाये दे रखी है                ...

बेरोजगारी

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  बेरोजगारी भैया आप भी form भर दो!  मैंने कहा था और उन्होने जवाब दिया,  मै भीख मांग लूँगा पर ये काम नहीं करूंगा।  किसी सरकारी जॉब का form निकला था, मैंने कहा था साथ काम करने वाले से form भरने को तो उन्होने ऐसा जवाब दिया जो मेरी समझ ही नहीं आया ।  जिस जॉब का form निकला हुआ था, वो समाज के बुद्धिजीवियो के हिसाब से छोटे दर्जे का काम था और वो उन्ही बुद्धिजीवियो मे आते थे ।  सोचने की बात ये है  कि  उन्हे कोई भी काम करके पैसे कमाने से ज्यादा भीख मांगकर खाना ज्यादा पसंद है।   कारण क्योकि कुछ विशेष तरह के काम करने मे उन्हे शरम महसूस होती है,   शायद तभी जितने ज्यादा पढे-लिखे लोग है बेरोजगारी उतनी ज्यादा है और ज़्यादातर ये बेरोजगार सिर्फ अपनी छोटी सोच की व ज ह से कोई काम नहीं कर पाते। You may also like- सरकारी नौकरी लड़कियों की जॉब

इंतज़ार

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  तुमने खाना खा लिया? वो अपनी महिला मित्र से पूछ रहा था फोन पर ।  आते ही रोज़ की तरह फोन लेकर अपने कमरे मे जाकर बैठ गया था वो।  उसकी माँ शारदा जी अभी भी उसे आवाज़ दे रही थी खाने के लिए।  काफी बार आवाज़ देने पर भी उसने सुना नहीं, तो वो उसके कमरे मे बुलाने गई थी उसे,  झल्लाकर उसने जवाब दिया था ,मैं खा लूँगा जब मुझे खाना होगा!   शारदा जी अपना काम करने रसोई मे चली गई।    उनका बेटा ना खाना खाने उनके पास आया, ना उसने रसोई से आती उनकी रोने की आवाज़ सुनी और ना ये देखा कि उन्होने भी अपने बेटे के इंतज़ार मे खाना नहीं खाया था । You may also like- पेंशन

पानी की बॉटल

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  सफर के दौरान एक जगह बस रुकी तो सामने खड़ी दूसरी बस पर नज़र गई।   बस के बाहर एक 12,13 साल का बच्चा पानी की bottle बेच रहा था, एक आदमी ने bottle तो ले ली पर पैसे निकालकर नहीं रखे उसके लिए और जब उसने मांगे तो बहुत आराम से जेब मे हाथ डालकर पैसे दिये उसे।   उस  बच्चे  के हाव भाव मे ड़र साफ दिख रहा था की अगर बस निकल जाएगी तो उसके पैसे नहीं मिलेंगे,  पर उस आदमी को पता नहीं क्या मज़ा आ रहा था उस बच्चे को परेशान करने मे वो पैसे हाथ मे रखकर उससे सवाल कर रहा था बेकार के।  उस बच्चे  को तो स्कूल मे या किसी संस्था मे सही जगह जाने मे मदद करनी चाहिए पर यहा तो वो आदमी उसे और परेशान कर रहा था ।   अगर हम ऐसे बच्चो की मदद नहीं कर पा रहे तो कम से कम उनकी मजबूरी का मज़ाक तो न बनाए। अगर आपको मनोरंजन ही करना है अपना,  तो और ढेर सारे साधन है उसके लिए, किसी दूसरे इंसान की मजबूरी का मज़ाक उडाकर कैसे मनोरंजन किया जा सकता है अपना। You may also like- बालश्रम लड़कियों की जॉब

Aquarium

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"Aquarium है हमारे घर मे” उसने बड़े गर्व से कहा ।  बहुत ध्यान रखते है हम मछलियो का , aquarium का पानी हम खुद बदलते है ताकि कोई मछली मर न जाए पर इतना ध्यान रखने के बाद भी last month एक मर गई थी।   बहुत दुखी हो वो  मछ्ली के मरने से ऐसा चेहरा बनाया था उसने ये बताते वक्त।  मै उसकी बात सुनकर हैरान थी क्योकि fish से बनी dishes बहुत पसंद थी उसको,  तो अगर घर मे रखी fish से इतना प्यार और लगाव था उसे तो, जो थाली मे मसाले मिलाकर खाने के लिए परोसकर दी जाती है उस पर दया क्यो नहीं आती है । You may also like- Animal lover मांसाहारी anda shakahari hai ya mansahari-kyo search karte hai ?

मीठी नीम

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    एक पौधा लगाना चाहती थी मै घर मे मीठी नीम का,  पास वाली नर्सरी से लेने गई तो भैया बोले फोटो खिचवाकर फेंक तो नहीं दोगे ? तब मुझे पहली बार समझ आया कि लोग फोटो के लिए पौधे लेकर फिर फेंक देते है।  शायद उन्ही कि नर्सरी के पास पौधे के साथ फोटो लेकर फेंक देते होंगे।   जो पौधा मैंने लिया था उसको अपने हाथ से लगाया था मैंने और अब उसे 7 साल हो गए है,  आज भी देखभाल करती हूँ मै उसकी, पर मेरे पास उसकी एक भी फोटो नहीं है,  ब स  उसे देखकर सुकून मिलता है,  पर आजकल likes और followers की होड़ वाली दुनिया मे ये सुकून शायद नहीं चाहिए किसी को, Likes और followers बढ़ाने है सबको फिर चाहे वो किसी का भी इस्तेमाल करे।   किसी की गरीबी , प्रकृति, दूसरा इंसान, खुद का शरीर यहा तक की भगवान ही क्यो न हो।   You may also like- Social Media पर्यावरण

पेंशन

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  पेंशन के लिए नाम जुड़वाने आई थी एक बूढ़ी महिला, मैंने पूछा था “आप अकेली आई है ?,, क्योकि लंबी लाईन मे लगने के बाद नंबर आया था उनका ।  उन्होने थकी हुई नज़र मुझ पर डाली और कहा, हाँ मै ही आई हूँ।  मैंने उनसे एक पेपर मांगा था जिसमे उनके बेटे का नाम हो मतलब घर के मुखिया का नाम हो ताकि उनकी पेंशन शुरू करवाई जा सके, वो अफसोस भरे लहजे मे बोली मेरा बेटा देगा नहीं मुझे पेपर, फिर वो चली गई और उनकी पेंशन शुरू नहीं ही पाई।                                                                      पेंशन मै सोच रही थी कि जिसने अपने बेटे के एक एक डॉक्युमेंट्स अपने हाथ से बनवाए है वो उनकी एक पेंशन शुरू करवाने के लिए अपने नाम के पेपर क्यो नहीं देगा ? You may also like- इंतज़ार

समानता

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   1-  राहुल रोज़ ऑफिस के लिए लेट हो जाता था,  जब उससे पूछा तो बोला घर मे बहन नहीं है सब काम मम्मी को अकेले करना पडता है ।  मैंने कहा करवा सकते साथ मे, तो उसने कहा  ये  सब हम करेगे क्या झाड़ू, पोचा, बर्तन ।   2-   पड़ोसी की बेटी बीमार प ड़  जाती थी बार  बार, उसकी मम्मी  उसके बारे मे बात करती हुई बोली लड़की जात होकर बार बार बीमार पर जाती है ।  3-  एक साथ काम करने वाला लड़का परेशान था कुछ दिन से मैंने पूछा तो बोला घर मे financial problem चल रही है मैंने कहा तुम्हारी सिस्टर नहीं करती जॉब? वो बोला वो क्यो करेगी मेरी ही जिम्मेदारी है मुझे ही करना है । 4-   एक दूसरे साथ कम करने वाली स्टाफ को एक्सट्रा रुकने के लिए  कहा    तो बोली घर मे काम है, मैंने पूछा तुम्हारा भाई? उसने कहा की वो तो जॉब करता है वो कैसे करवा सकेगा जबकि जॉब वो खुद भी करती थी ।   some stories that hurts.                                   ...